कुछ दबे से अल्फ़ाज़

हैं अल्फ़ाज़ कुछ दबे से,कुछ ख्वाहिशें मैंने तुझसे छुपाई हैं,महसूस करने लगा हूं खुद को अपनों से दूर,शायद यही है दुनिया का दस्तूर। बहुत कुछ था हमारे दर्मियां,लेकिन अब हर पल दिल में एक कश्मकश है,सब कुछ होने के बावजूद,कुछ भी यहां अपना सा नहीं है। वक़्त तेरे पास मेरे लिए थोड़ा सा तो था,पर …

Dear Guru

How does it sound? Odd, or inapt or, just Divine, the title feels. But you are not my dear? Guru, you are dearest to me. Said, unsaid, Heard, unheard, Felt, unfelt, Seen, unseen, Is there anything that you'll ever miss? What all & how you'll teach me. The opposites, the similarities, The journey, the destination, …

Mental health can’t be an afterthought

I don't think that Mental Health needs attention only when some celebrity or any young lad or any common man/woman commits suicide. This is to be addressed every moment of every day. Mental Health & Hygiene is not a topic to be attended to only when such unfortunate events have taken place. It needs to …

Everytime I come to write

"Paper over people. Anyday!" Sharing our happiness, the positive, the memorable moments, re-collecting those pictured memories is much easier than sharing our own fears, the little disturbing incidences, the negative, talking about our own sensitivities, or the ugly truth. Isn't it? How many of you agree with me? Even if you don't disclose, I'm certain …

कुछ है जो मुझमें

कुछ है जो मुझमें मेरा है।कुछ है जो मुझमें तेरा है। कुछ है जो मुझमें अधूरा है।कुछ है जो सिर्फ तुझसे पूरा है। कुछ है जो मुझसे बेगाना है।कुछ है जो तुझसे जाना - पहचाना है। कुछ है जो मुझसे छूटा है।कुछ है जिससे इस डोर को तूने थामा है। कुछ है जिससे मैं डरता …

सोशल – डिसटेंसिंग

बड़ा ही अच्छा समय है।यूं ज़िन्दगी की भाग दौड़ में किसी दिन मुझे चश्मा नहीं मिलता था तो परेशान रहता था। चश्मा जल्दबाज़ी में बिना साफ किए पहन लेता था, तो भी दुनिया को साफ नज़र से देख रहा था। मगर अब… अब घंटों बिना चश्मे के आराम फरमा रहा हूं। क्योंकि बहुत दूर क्या …